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अधिकारवादी व्यक्तित्व अपने आप में एक ऐसी धारणा ,‘मैं ही जनशक्ति हूं’मैं जो कुछ भी कहूंगा, वह सही होगा,मेरे ही पास से गुजरना चाहिए। इतिहास उठाकर देखें तो पता चलेगा कि जब-जब इस हद तक केंद्रीकरण हुआ है, व्यवस्थाएं धराशायी हुई : रघुराम राजन

जुनैद मलिक अत्तारी
नई दिल्ली

महामारी कोरोना-वायरस कोविड-19 के संकट काल में अर्थव्यवस्था के सामने आ रही चुनौतियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से चर्चा की, इस चर्चा में रघुराम राजन ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती लोअर मिडिल क्लास और मिडिल क्लास के लिए आने वाली है जिसके पास अच्छे जॉब नहीं होंगे, इस चर्चा का कांग्रेस के सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारण किया गया,चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि मुझे गांधी जी का वह कथन पसंद है कि कतार के आखिर में जाओ और देखो कि वहां क्या हो रहा है। एक नेता के लिए यह बहुत बड़ी सीख है, इसका इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन मुझे लगता है कि यहीं से काफी चीजें निकलेंगी, रघुराम राजन ने कहा हमारे पास लोगों के जीवन को बेहतर करने का तरीका है, फूड, हेल्थ एजुकेशन पर कई राज्यों ने अच्छा काम किया है,आंकड़े चिंतित करने वाले हैं। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार कोरोना संकट के कारण करीब 10 करोड़ और लोग बेरोजगार हो जाएंगे। 5 करोड़ की तो नौकरी जाएगी, 6 करोड़ लोग श्रम बाजार से बाहर हो जाएंगे। आप किसी सर्वे पर सवाल उठा सकते हो, लेकिन हमारे सामने तो यही आंकड़े हैं. राहुल गांधी ने सवाल किया कोरोना बीमारी को हम नियंत्रित नहीं कर पा रहे, इसलिए जैसा कि आपने कहा, इसे रोकना होगा। एक और चीज है जो मुझे परेशान करती है, वह है असमानता। भारत में बीते कई दशकों से ऐसा है। जैसी असमानता भारत में है, अमेरिका में नहीं दिखेगी, रघुराम राजन ने कहा कि लॉक-डाउन हमेशा के लिए नहीं रखा जा सकता, दूसरे लॉक-डाउन का मतलब यह है कि आप पहले लॉक-डाउन में पूरी तरह से सफल नहीं रहे, सरकार को इसे खत्म करने और उसके कुशलता से प्रबंधन की योजना बनानी होगी, लोगों की जीविका को खोलना जरूरी है, लेकिन काफी काम करना होगा, यह सुनिश्चित करना होगा कि वर्कप्लेस सुरक्षित हों, इकोनॉमी खोलने से पहले काफी टेस्ट करना होगा, टेस्ट क्षमता बढ़ानी होगी, रघुराम राजन ने कहा, हमारी क्षमता और संसाधन सीमित हैं, आर्थिक संसाधन सीमित हैं, जब हम इकोनॉमी को खोलें तो यह बेहतर तरीके से चले, लोगों का जीवन बचाना भी बहुत जरूरी है यह अभूतपूर्व महामारी है.’
उन्होंने कहा कि गरीबों की मदद करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का फायदा उठाना होगा, पेंशन, मनरेगा जैसी योजनाओं से फायदा देना होगा, लोगों के पास जॉब नहीं है, अगले तीन-चार महीने अनिश्चिततता है, हमें उनको सपोर्ट देना होगा, करीब 65000 करोड़ रुपये खर्च कर गरीबों को सपोर्ट दे सकते हैं, यह कोई ज्यादा नहीं है, हमारा जीडीपी 200 लाख करोड़ का है, हम कर सकते हैं, अगर यह गरीबों की जिंदगी बचाने के लिए है तो करना चाहिए, डॉक्टर राजन ने कहा कि अधिकारवादी व्यक्तित्व अपने आप में एक ऐसी धारणा बना लेता है कि , ‘मैं ही जनशक्ति हूं’ इसलिए मैं जो कुछ भी कहूंगा, वह सही होगा।

सब कुछ मेरे ही पास से गुजरना चाहिए। इतिहास उठाकर देखें तो पता चलेगा कि जब-जब इस हद तक केंद्रीकरण हुआ है, व्यवस्थाएं धराशायी हो गई हैं, आने वाले हफ्तों में राहुल गांधी कोरोना महामारी के मुद्दों पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से बात करेंगे, बता दें कि कोरोना को लेकर राहुल गांधी लगातार सक्रिय हैं. हाल ही में उन्होंने मोदी सरकार से लॉक-डाउन के बाद का प्लान पूछा था, राहुल कोरोना वायरस की टेस्टिंग और अर्थव्यवस्था को लेकर सुझाव देने के मामले में सक्रिय रहे हैं।

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