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शिक्षा नीति पर सुझाव के लिए सरकार ने बढ़या एक महीने तक का समय अवधि

नईदिल्ली। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति के गठन पर सभी पक्षों के विचार और सुझाव जानने की अवधि में एक महीना ओर बढ़ा दिया है। इस पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब दिया कि प्रस्तावित शिक्षा नीति के मसौदे पर पिछले चार साल से सार्वजनिक चर्चा चल रही है।


वहीं उन्होंने कहा कि मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले इस पर सभी पक्षों के सुझाव प्राप्त करने की अवधि एक महीने बढ़ाएंगे। सभी को मुफ्त और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिये आरक्षित 25 फीसदी सीटों पर दाखिले का ब्योरा देते हुये निशंक ने बताया कि पिछले पांच साल में आरक्षित सीटों पर दाखिला पाने वाले बच्चों की संख्या 18 लाख से बढ़कर 41 लाख हुई है।

निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों पर 2014 में 18 लाख बच्चों को दाखिला मिला था। यह संख्या साल 2015 में 24 लाख, साल 2016 में 29 लाख, साल 2017 में 34 लाख और साल 2018-19 में 41 लाख हो गई है।

गौरतलब है कि शिक्षा के अधिकार से वंचित बच्चों की पहचान कर सूचीबद्ध करने से जुड़े एक अन्य पूरक प्रश्न के जवाब में निशंक ने बताया कि सबके लिए अनिवार्य शिक्षा कानून का पालन सुनिश्चित करने के तहत शिक्षा प्राप्त कर रहे बच्चों और इस अधिकार से वंचित बच्चों की ग्राम पंचायत स्तर पर सूचियां बनाई जा रही हैं।

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