बिहार

ऐश्वर्या में तेजप्रताप यादव का राधा तलाशना ‘ग़लती’ किसकी ?

रिपोर्ट रामबालक राम 

फ़िल्म शुरू होने से पहले एक वैधानिक चेतावनी आती है, ‘धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक है’. मगर कोई इस पर ग़ौर ही नहीं करता. प्रेम में भी ऐसी ही चेतावनी आती हैं. ‘प्रेमपान’ में जुटे दिल भी कुछ भी हानिकारक होने की फिक़्र नहीं करते.

दिल के पंप से खून फेंकते ये जवां लोग मिलन की हर तारीख़ को वेलेंटाइन्स डे बना देते हैं. फ़िल्म शुरू हुई है तो ‘विलेन’ भी आएंगे. ये अपने परिवार, दोस्त, समाज के रचे विलेन होते हैं जो कोई भी काम दो ही विचारों में धँसकर कर पाते हैं

ऐसी रियल लाइफ़ कहानियों में एक गोरी सी लड़की अपने बाजू में सांवले से लड़के को बैठाकर हम सबसे कहती है, ‘देखिए हम लोग एक साथ भागे हैं. ठीक है? इनका कोई ग़लती नहीं है.’

ये है अपनी राधा. फ़िल्म की हीरोइन. जो परंपरा, समाज, चांस जैसे विलेन की आँख में आँख डालना जानती है. वही राधा, जिसे तेज प्रताप यादव खोज रहे हैं. लेकिन तलाक की अर्ज़ी के बाद. या शायद पहले से .

जीवन साथी राधा चाहिए या कृष्ण

लालू प्रसाद के बेटे तेजप्रताप यादव ने पाँच महीने पुरानी शादी ख़त्म करने का फ़ैसला किया है. तेजप्रताप ने कहा, ”मेरा और पत्नी ऐश्वर्या राय का मेल नहीं खाता. मैं पूजा पाठ वाला धार्मिक आदमी और वो दिल्ली की हाईसोसाइटी वाली लड़की. मां-बाप को समझाया था. लेकिन मुझे मोहरा बनाया. मेरे घरवाले साथ नहीं दे रहे हैं.”

तेजप्रताप मथुरा के निधिवन और ज़िंदगी में राधा की तलाश में नज़र आते हैं और उस भीड़ का हिस्सा बन जाते हैं, जिनके घरवाले उनका साथ नहीं देते. वो मोहरा बन जाते हैं जाति, धर्म, रुतबे और हाईसोसाइटी बनाम लो-सोसाइटी के.

ये वही सोसाइटी है, जो किसी के तलाक की ख़बरों को चटकारे लगाते हुए पढ़ती है. किसी जोड़े के निजी फ़ैसलों की वजहों को कुरेदकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहती है.

लेकिन सालों से मौजूद उस निष्कर्ष को �

Related Articles