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जब भीगा सैनेटरी पैड लेकर दोस्त के घर नहीं जाते तो मंदिर कैसे जायेगे – स्मृति ईरानी

नई दिल्ली । इन दिनों सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने मंगलवार को दिए अपने बयान पर सफाई दी है। और वही ईरानी ने कहा है कि पारसी से शादी होने बाद भी उन्हें भी मुंबई के फायर टेंपल में जाने की इजाजत नहीं मिलती है। लेकिन वही इस फैसले का वह सम्मान करती हैं। जहां सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विवादों के बीच केंद्रीय मंत्री ईरानी ने मंगलवार को कहा था कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं जब खून से सना पैड लेकर दोस्त के घर नहीं जातीं तो भगवान के घर कैसे जा सकती हैं। वही ईरानी का यह बयान आने के बाद काफी विवाद हुआ जिसपर उन्होंने अपनी सफाई पेश की। और वही ईरानी ने ट्वीट कर लिखा कि ये फेक न्यूज है और वो जल्द ही इसका वीडियो पोस्ट करेंगी। वही स्मृति ईरानी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक नया वीडियो डाला है। जहां स्मृति ईरानी का दावा है कि इस वीडियो में पूरा बयान है। लेकिन वीडियो के मुताबिक स्मृति अपने एक अनुभव को साझा कर रही थीं। और इस वीडियो में वह बता रही हैं कि कैसे एक फायर टेंपल में धार्मिक रीति रिवाज की वजह उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया गया था।

लेकिन उनका कहना था की इस रिवाज की वजह से उन्हें मुंबई के अंधेरी के फायर टेंपल के बाहर उन्हें खड़ा होना पड़ा था। बतादें की ईरानी का कहना है कि पारसी बच्चों की मां होने के नाते मैंने पारसी समुदाय की भावनाओं का खयाल किया और मंदिर में प्रवेश के लिए कोर्ट कचहरी में नहीं गई। वही ठीक इसी तरह रजस्वला पारसी या गैर-पारसी महिलाएं भी मंदिर नहीं जातीं, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो। वही ईरानी ने कहा कि मेरे पूर्व के बयानों के यह तथ्य हैं और बाकी सब दुष्प्रचार है। गौरतलब तो यह है कि सप्रीम कोर्ट के आदेश पर 10 से 50 साल रजस्वला आयु वर्ग आयु की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध हटाए जाने के बाद सबरीमाला मंदिर के कपाट सभी महिलाओं के लिए खोल दिए गए थे। जिसे सोमवार रात बंद कर दिया गया। लेकिन मंदिर के गर्भगृह तक रजस्वला महिलाओं को प्रवेश नहीं कराया जा सका। वही सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने के दिन से कई हिंदुवादी संगठन परंपरा पर हमला बता कर प्रदर्शन करते रहे। जहां इस दौरान 10 50 आयुवर्ग की महिलाओं ने मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने का प्रयास भी किया लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इन्हें रोक दिया। जहां इस दौरान हिंसक झड़पें भी हुईं। वही दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट का कहना है की वह केरल के सबरीमाला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले उसके फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अब सुनवाई 13 नवंबर को करेगा।

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