प्रयागराज जोन

HC का आदेश,मनरेगा में ग्राम प्रधान की बर्खास्तगी को रद्द

प्रयागराज  : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मनरेगा की दो लाख रुपये से अधिक राशि हजम करने पर बर्खास्त करने के मामले में ग्राम प्रधान को कार्यवाही की तकनीकी खामियों के कारण राहत दे दी है। कोर्ट ने ग्राम प्रधान की बर्खास्तगी से पहले सुनवाई का मौका देने की कानूनी बाध्यता का उल्लंघन करने के कारण जिलाधिकारी एटा के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही ग्राम प्रधान को तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है। हालांकि कोर्ट ने सुनवाई का मौका देते हुए याची के विरुद्ध नए सिरे से कार्यवाही की भी छूट दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने लोहचा नाहरपुर गांव की प्रधान पुष्पा देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

याची के अधिवक्ता का कहना था कि जिलाधिकारी एटा ने पंचायतराज अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। याची के खिलाफ लगाए गए अधिकतर आरोपों को निराधार पाया गया है। उसे केवल मनरेगा योजना के दो लाख दो हजार 553 रुपये की अनियमितता का दोषी करार दिया गया है। इसके अलावा याची को पद से हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है, जो कानून के तहत अनिवार्य है। सरकारी वकील का कहना था कि याची को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उसकी तरफ से दिए गए स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाया गया । जांच रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्त किया गया है। याची का कहना था कि बर्खास्तगी से पहले नोटिस नहीं दिया गया है, जो धारा 95(1) का खुला उल्लंघन है।

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