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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- संक्रमण नियंत्रित न हुआ तो बड़ा खतरा बन सकती है कोविड-19 महामारी

 

उत्तर प्रदेश कोरोना वायरस संक्रमण निरंतर बढ़ रहा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे ही लापरवाही चलती रही और संक्रमण नियंत्रित न हुआ तो आगे चलकर यह महामारी बड़ा खतरा बन सकती है। वहीं, कोविड-19 को लेकर केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन न कराने को लेकर तलब प्रयागराज के जिलाधिकारी व एसएसपी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना कार्रवाई स्थगित कर दी है। दोनों अधिकारियों ने ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया है। याचिका पर सुनवाई 25 अगस्त को होगी।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि प्रदेश की पुलिस व जिला प्रशासन संक्रमण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाएंगे। सरकारी गाइडलाइन को अमल में लाया जाएगा। किसी को भी बिना मास्क लगाए घर के बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी और शारीरिक दूरी मानक का पालन अनिवार्य होगा। प्रयागराज क्वारंटाइन सेंटर में व्याप्त गंदगी व अस्पतालों में इलाज की बेहतर सुविधाओं को लेकर कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा व न्यायमूर्ति अजीत कुमार की खंडपीठ ने दिया है।अधिवक्ता राम कौशिक व प्रियंका मिड्डा ने कुछ फोटोग्राफ दाखिल कर प्रयागराज के जिलाधिकारी व एसएसपी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की थी। कोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी व एसएसपी अभिषेक दीक्षित वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हाजिर हुए। उन्होंने जिला प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी। आश्वासन दिया कि संक्रमण पर नियंत्रण किया जाएगा। कोर्ट ने जब जिलाधिकारी से पूछा कि क्या सरकार की गाइडलाइन को लागू करने के लिए अपने स्तर पर आपने भी निर्देश जारी किए हैं? वे ऐसा कोई आदेश को दिखाने में असमर्थ रहे। डीएम ने कहा कि रिकॉर्ड चेक करके शहर में एक धारा 144 लागू करने के निर्देश की जानकारी कोर्ट में पेश करेंगे।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज में लेवल-3 के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के बारे में अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल से जानकारी मांगी। सीएमओ व मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह मौजूद थे। गोयल ने कोर्ट को बताया वार्ड नंबर सात और आठ को कोरोना मरीजों के लिए आईसीयू में तब्दील किया गया है। उसमें 40 बेड की व्यवस्था है, वहां 24 घंटे 12 डॉक्टर निगरानी रखते हैं। वार्ड संख्या नौ और 10 में 30-30 बेड, वार्ड संख्या 15 व 16 में 48-48 बेड मिलाकर कुल 156 बेड हैं। उन्हेंं आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किया गया है। वार्ड संख्या 14 एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) घोषित कर दिया गया है। वहां 48 बेड हैं।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोरोना मरीज कीडगंज की चुन्नी देवी के स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में भर्ती रहने के दौरान शौचालय के लिए जाते हुए रास्ते में गिरकर मरने की घटना को गंभीरता से लिया। कहा कि चुन्नी देवी के गिरने पर उनके पास कोई नर्स या डॉक्टर काफी देर तक नहीं पहुंचा। कोर्ट ने इसकी जांचकर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। पूछा है कि स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में कोरोना के कितने मरीज भर्ती हुए। इसमें कितनी की मौत कोरोना और दूसरी बीमारियों के कारण हुई हैं। कोर्ट ने कहा कि 15 मरीज पर तीन नर्स और एक डॉक्टर होने चाहिए।इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय में कोरोना मरीजों के लिए सरकार की ओर से जारी किए गए फंड व अस्पतालों में दवा की उपलब्धता की भी जानकारी मांगी है। वेबसाइट पर एक डेटा बेस तैयार किया जाए, ताकि जांच आइडी नंबर से एक क्लिक में लोगों को जांच रिपोर्ट आसानी से मिल सके। सीएमओ प्रयागराज ने स्वीकार किया कि पहले जांच रिपोर्ट आने में देरी होती थी, लेकिन अब से 36 से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट दी जा रही है। शिकायतकर्ता अरविंद कुमार ने बताया कि आगरा में जांच कम हो रही है। मरने वाले कोरोना मरीजों की संख्या कम बतायी जा रही है। इस पर कोर्ट ने सरकार से जानकारी तलब की है।नगर निगम प्रयागराज द्वारा अतिक्रमण हटाने के मामले में कोर्ट ने दो एडवोकेट को कमिश्नर नियुक्ति किया है। एडवोकेट कमिश्नर चंदन शर्मा व रामकौशिक अतिक्रमण हटाने की जगहों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देंगे। वह शहर में फागिंग, दवाओं के छिड़काव की व्यवस्था देखेंगे। कोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन को एडवोकेट कमिश्नर की हर तरह से मदद करने की का निर्देश दिया है। नगर निगम के अधिवक्ता एसडी कौटिल्य ने कहा नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग नहीं है और न ही कोई डॉक्टर है। कोर्ट ने राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने कहा कि चर्चा है कि केवल वीआइपी और पॉस इलाके में ही फॉगिंग हो रही है। सब्जी विक्रेता व अन्य दुकानदारों को वेंडिंग जोन बनाकर वहां स्थान देने व नगर निगम द्वारा लगाए गए डस्टबिन का ब्योरा मांगा है।

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