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PM मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के सपने को पूरा करने के लिए रचा मध्य प्रदेश का खेल- कांग्रेस के वकील|

मध्य प्रदेश में जारी सियासी संग्राम के बीच कांग्रेस की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की. दरअसल इस याचिका में कांग्रेस ने बीजेपी पर 16 विधायकों की किडनैपिंग का आरोप लगाया है. इस मामले पर कांग्रेस की ओर से दुष्यंत दवे ने जिरह की. दवे ने कोर्ट से जवाब देने के लिए और वक्त दिये जाने की मांग करते हुए कहा, आसमान नहीं गिर जाएगा, अगर कोर्ट आज सुनवाई नहीं करता. इस मामले में बागी विधायकों की ओर से मनिदर सिंह पेश हो रहे हैं. उन्‍होंने कहा, किसी विधायक का अपहरण नहीं किया गया. इस पर दवे ने कहा, MLA से उम्मीद की जाती है कि वो चुनकर आने के बाद अपने इलाके की सेवा करे न के इस्‍तीफा दे दे.

दवे ने कहा, कांग्रेस को चुनाव में 114 सीटें मिलीं जबकि बीजेपी को 109. लोगों ने कमलनाथ सरकार पर उसी दिन विश्वास जता दिया था. राज्‍य में 18 माह से अस्‍थायी सरकार काम कर रही है. इस दौरान दवे की मुकल रोहतगी से तीखी नोकझों हुई.

गवर्नर के रुख पर भी सवाल उठाते हुए दवे ने कहा, क्या एक गवर्नर से ऐसे काम की अपेक्षा की जाती है! वो पहले से ही यह मानकर चल रहे हैं कि सरकार बहुमत खो चुकी है लेकिन बिना किसी को सुने वो कैसे इस नतीजे पर पहुंच सकते हैं.

दवे ने कहा, बिना सभी विधायकों की मौजूदगी के फ्लोर टेस्ट नहीं हो सकता. अगर 22 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो जाने के बाद वो सीटें खाली हो जाती हैं, तो बहुमत परीक्षण तब तक नहीं हो सकता है जब तक कि उन 22 सीट के प्रतिनिधि सदन में मौजूद नहीं हों. इसके लिए उपचुनाव के जरिये 22 सीटो पर विधायक चुने जाना ज़रूरी है. दवे ने कहा, स्थाई सरकार संविधान का बेसिक फीचर है. इसलिये 5 साल का वक़्त दिया जाता है. गवर्नर को कोई अधिकार नहीं है कि वो रात को CM या स्पीकर को निर्देश दे. कोर्ट ने पूछा- अभी तक कितने इस्तीफे स्वीकार हुए हैं. इस पर कोर्ट को बताया गया कि 6 इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं.

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