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आखिर क्यों फांसी की सजा सुनाने के बाद तोड़ दी जाती पेन की निब

आज के समय में हमारे देश में अपराध दिन – प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। देखा जाए तो सरकार इस पर रोकथाम करने में निष्फल साबित हो रही हैं। वहीं चाहे हम बात करें दिल्ली निर्भया केस की या फिर उन्नाव रेप केस की हर तरफ रेप जैसे वारदात सामने आ रहे हैं।

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वहीं देखा जाए तो आरोपी अपराध करने से नहीं डर रहा हैं न ही आरोपी को सजा का डर हैं. वहीं देखा जाए तो हमारे देश में बड़े से बड़े अपराध कई सालों तक चलते रहते हैं। लेकिन वहीं अंत में जो इसकी सजा सुनाई जाती हैं या तो फासी की होती हैं या फिर उम्र कैद कि सजा होती हैं। लेकिन क्या आप ये जानते हैं की फांसी की सजा सुनाने के बाद पेन की निब क्यों तोड़ दी जाती हैं।

आइए जानते हैं कि फांसी की सजा देने के बाद आखिर पेन कि निब क्यों तोड़ दी जाती हैं-

दरअसल यह प्रचलन भारत में ही है। जहां भारतीय कानून के अनुसार, जब किसी मुजरिम को फांसी या मौत की सजा सुनाई जाती है तो उसके तुरंत बाद ही जज द्वारा पेन की निब तोड़ दी जाती है। लेकिन भारतीय कानून में सबसे बड़ी सजा फांसी की सजा है। रेयर ऑफ रेयरेस्ट केस, यानी जघन्यतम अपराध के मामले में ही मुजरिम को फांसी की सजा सुनाए जाने का प्रावधान है। जिस व्यक्ति का अपराध जघन्यतम अपराध की श्रेणी में आता हो, उसे ही मौत की सजा सुनाई जा सकती है।

जहां ऐसे किसी भी मामले में सजा सुनाने के बाद जज अपने पेन की निब को तोड़ देते हैं। इस आशा में की दोबारा ऐसा अपराध न हो। एक कारण यह भी माना जाता है कि इस सजा के बाद किसी व्यक्ति का जीवन समाप्त हो जाता है, इसलिए ये सजा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ दी जाती है, ताकि पेन का भी जीवन समाप्त हो जाए और इसके बाद पेन द्वारा कुछ भी और लिखा न जा सके।  लेकिन एक गुंजाइश यहां भी बाकी रह जाती है। मौत की सजा के मामले में आखिर में सजा माफी की याचिका पर विचार करना केवल देश के राष्ट्रपति के हाथ में होता है। वह अपने विवेक के आधार पर अपराधी को माफ भी कर सकते हैं।

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