राजनीति

सियासी आरोप खूब लगे, लेकिन राम नाईक ने फैसले संविधान के मुताबिक लिया

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक का पांच साल का कार्यकाल रविवार (21 अगस्त 2018) को पूरा हो गया । गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल उनकी जगह लेंगी। यूपी के गवर्नर के रूप में पांच वर्ष पूरे कर चुके राम नाईक के कार्यकाल को दो हिस्सों (राम नाईक का आधा कार्यकाल अखिलेश सरकार में आधा योगी राज में गुजरा) में बांट कर देखा जाए तो उनके पूरे कार्यकाल को किसी ने आधा भरा गिलास के रूप में देखा तो किसी ने आधा खाली गिलास के रूप में। पांच वर्षों में राम नाईक ने जो फैसले लिए, उनकी धमक जनता के साथ सत्ता भी लगातार महसूस करती रही। अखिलेश सरकार लगातार राम नाईक से परेशान दिखी तो योगी सरकार के लिए नाईक कभी मुश्किलों का कारण नहीं बने।

पूर्व के राज्यपालों की परंपरा को तोड़ते हुए नाईक ने सरकार को कई फैसलों को अपने हिसाब से कसौटी पर कसा। राजभवन पर सियासी होने के भी आरोप खूब लगे, तो नाईक ने संविधान का हवाला देकर अपने आप को सही ठहराया। राज्यपाल जैसे गैर राजनैतिक पद पर होने के बाद भी नाईक उत्तर प्रदेश की राजनीति में हर पल अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे। आनंदी पटेल के लिए अपनी नई तैनाती में सबसे बड़ी परीक्षा की घड़ी यही होगी कि वह न केवल राम नाईक के बराबर अपने को खड़ा करें। इसी तरह से महिला राज्यपाल होने के नाते आनंदी पटेल को सरोजनी नायडू के स्थापित आदर्शों को भी याद रखना होगा। सरोजनी नायडू के बाद आनंदी पटेल दूसरी महली गवर्नर हैं।

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