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बुधवार को ही क्यों माना जाता है गणपति का दिन

बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है और उनके अधिपति देवता भगवान गणेश जी हैं। बुध को बुद्धि, वाकपटुता, कला, निपुणता, विचार, चरित्र, विद्या का कारक माना गया है। इन सभी चीजों पर अधिपत्य श्री गणपति जी का है, इसीलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए बुधवार के दिन उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है।

गणपति पूजन की सामग्री
श्री गणपति पूजन के लिए सुंदर सी पीतल की थाली में पुष्प, दीप, धूप, चंदन, कपूर, मौली, रोली, कुमकुम, अक्षत, दूर्वा, पान और मोदक, यह सामग्री एकत्रित कर लें।

ऐसे करें गणपति बप्पा की पूजा
किसी भी देवता की पूजा में दीपक का ज्यादा महत्व रहता है। इसलिए गणेश जी के पूजन में सबसे पहले दीपक प्रजवल्लित करें। इसके पश्चात् गणपति महाराज को पुष्प समर्पित करते हुए चन्दन का तिलक करें और लड्डू का भोग लगाएं। आप चाहें तो तो लड्डू के स्थान पर अपने द्वारा बनाया गया कुछ और भी भोग लगा सकते हैं। भोग लगाने के पश्चात जल समर्पित करें। पूजन के प्रश्चात प्रसाद स्वरूप लड्डू ब्राह्मणों में, घर के सदस्यों में जरूर वितरित करें और सपरिवार गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना न भूलें।

गण मंत्र : “ॐ भालचन्द्राय नमः”
यह मंत्र गणपति महाराज को समर्पित है। इस मंत्र के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में निराशा नहीं रहती है। कोई भी अप्रिय घटना नहीं घटती है। इस मंत्र के जाप से घर में खुशहाली का वातावरण बना रहता है। व्यक्ति प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति करता है। व्यक्ति के शरीर की सुंदरता बढ़ती है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

इस उपाय से पूरी होगी मनोकामना
गणपति को प्रसन्न करने के लिए बुधवार के दिन पांच दूर्वा की 11 गाँठ किसी लाल धागा में बाँध कर गणपति जी को चढ़ाएं और रात को गणपति जी को चढ़ाया हुआ अक्षत और कोई लाल फूल लेकर अपने सिरहाने रख कर सोएं। इस उपाय से गणपति जी की कृपा होगी और उनके दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होगा। आपकी सभी मनोकामना भी पूर्ण होगी

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