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कानपुर के नौबस्ता मे ख़ानक़ाहे राहे सुलूक ने ठन्ड से बचाने के लिये ग़रीबों को बाटे कम्बल

रिपोर्ट कानपुर ब्यूरो

कानपुर के नौबस्ता मे हुज़ूर रहमते आलम का मीलाद मनाने पर अल्लाह की जानिब से बड़ा ही अज्र व सवाब मिलता है और मीलाद कराने वालों से अल्लाह व रसूल ख़ुश भी रहते हैं मगर इसी के साथ मीलाद कराने वालों को चाहिये कि व सिर्फ महफिल को सजाना, लोगों को बुलाना, नात व तक़रीर सुनना सुनाना हीअपना फरीज़ा ना समझें बल्कि नमाज़, रोज़ा, यतीमों, मिस्कीनों के साथ अच्छा बरताव, माँ बाप की फरमाँ बरदारी और हर वह नेक काम जिसे प्यारे मुस्तफा अज़ीज़ रखते थे उसे अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बनाएँ तब कहीं जाकर मीलाद के अस्ल फैज़ान से मालामाल होने का हमें मौक़ा मिलेगा
और तालीमाते ग़ौस व मदार तो दूर हर वली, हर क़ुतुब, हर अब्दाल, हर सालिक, हर सूफी की तालीम वही है जो तालीम मुस्तफा जाने रहमत ने दी है, जिस तरह आज ख़ानक़ाहे राहे सुलूक ने ठन्ड से बचाने के लिये ग़रीबों को कम्बल तक़सीम किये इसी तरह का जज़्बा हर मोमिन के दिल में होना चाहिये अगर एैसा हर मोमिन करे तो यक़ीनन ना किसी ग़रीब की सर्दी की वजह से, ना किसी मिस्कीन की भूक की वजह से और ना किसी यतीम की छत ना मिलने की वजह से मौत हो, इन तालीमात को अपनी ज़िन्दगी में अमली जामा पहनाने पर मदारे पाक, ग़ौसे आज़म,सरवरे कौनैन के साथ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त भी राज़ी होगा खानकाह के सदर सालिक सूफी हाफिज मोहम्मद सलीम कादरी जहाँगिरी ने

जानकारी देते हुए बताया ख़ानक़ाहे क़ादरिया रज़्ज़ाक़िया राहे सुलूक का यही मिशन है कि वह अपने अस्लाफ की तालीम का चिराग़ हर घर और हर दिल में जला कर इतना उजाला करदे कि दुनिया में कहीं इल्म व अमल की तारीकी ना रहे और हर मोमिन के दिल में अपने और ग़ैरों के लिये मोहब्बत पैदा हो जाए, हर एक के साथ तवाज़ो व इन्केसारी के साथ पेश आएँ, अपने मुल्क और अहले मुल्क की मोहब्बत को सीने में बसा लें तो इन्शा अल्लाह हमारी दुनिया व आख़िरत नूरे ख़ुदा से मामूर हो जाएगी और हमें वह सुकून भी मयस्सर आएगा जिसे हम (जगह जगह तलाश करते हैं आज हमारे घरों मे जो बेदीनी माहौल की वजह से तरह तरह के फसाद पैदा हो रहें है जो की हम उन फसादों को समझ भी नहीं पाते जो हमारे घर मे ये फसादों का जरिया सिर्फ बेदीनी है इस वजह से ऐसा होता है नबीये करीम का फरमान आज हम भूल बैठे हैं जिसकी वजह से आज हम तबाही व बर्बादी की कगार तक पहुँच चुके हैं हमे अपने सादात इकराम सय्यद जादों का एतराम तमाम आलमे इस्लाम पर वाजिब किया है इस लिये हमें सय्यदों का एतराम करना चाहिये अपने  इलाकों के इमामों व खतीबो व हाफीजो से हमें मोहब्बत करनी चाहिये और हमें बच्चों को कुरआन व नमाज की तालीम दिलाने के लिये हमें फक्र करना चाहिये

की जिसकी वजह से हमारी आखरत बन सकती है वो है हमारे घरों का दीनी तालीमी माहौल जिसे आज हम भूल बैठे हैं हमें अफसोस करना चाहिये हमारे घरों के माहौल से खुदा के वास्ते अपने बच्चों को दीनी तालीमात हासिल कराएं और बताया हमारी खानकाह का जो नारा है हमारा मकसद है एक खुदा की इबादत उसके मख्लूक़ की खिदमत करना इस प्रोग्राम मे शिरकत करने वाले खुसूसी मेहमान पीर सय्यद सूफी इखलाख अली जहाँगिरी सय्यद फारूक रजा कादरी सय्यद आदिल अहमद सय्यद आसिफ सय्यद मोहम्मद अदनान सय्यद साहब सय्यद शहनवाज चिश्ती सय्यद ताहा मौलाना मोहम्मद हशमत अली अशरफी मोहम्मद फाजिल कमर हसन मोहम्मद रजा उर्फ रिक्की अख्तर अली गुड्डू मोहम्मद शमीम कादरी मोहम्मद तौफीक कादरी नसीम सिददीकी अन्य लोग मौजूद रहें ।

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