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छठ पूजा त्योहार छठी मइया लेकिन क्यों की जाती है सूर्य उपासना, जानिए पूरी कथा

11 नवंबर से नहाय खाय के साथ छठ महापर्व आरंभ हो गया है। यह महापर्व 11 नवंबर से 13 नवंबर तक चलेगा।  षष्ठी और सप्तमी को पवित्र नदी के जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। छठ पर्व में सूर्य भगवान की पूजा की जाती है फिर भी इसे सूर्य पूजा कहने की बजाय छठ पर्व के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि छठ मैया के प्रसन्न होने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। छठ मैया के इन्हीं गुणों के कारण सूर्य पूजा को छठ पर्व के रूप में मान्यता मिली।

देवी भागवत पुराण के अनुसार राजा प्रियव्रत विवाह के कई वर्षों बाद भी संतान सुख के लिए तरसते रहे। संतान सुख पाने के लिए इन्होंने सूर्य की उपासना की। सूर्य की कृपा से प्रियव्रत के घर बालक का जन्म हुआ, लेकिन जन्म लेते ही बालक की मृत्यु हो गयी। प्रियव्रत बहुत दुःखी हुए। बालक के शव को लेकर श्मशान पहुंचे। श्मशान में बच्चे के मृत शरीर को देखकर प्रियव्रत के अंदर जीने की इच्छा खत्म हो गई। इसी समय प्रियव्रत के सामने एक देवी प्रकट हुई।

प्रियव्रत ने देवी की पूजा की और मृत बालक को जीवनदान देने की प्रार्थना करने लगे। प्रियव्रत की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने राजा प्रियव्रत से कहा कि मैं ब्रह्माजी की मानस पुत्री देवसेना हूं। कुमार कार्तिकेय मेरे पति हैं। मूल प्रकृति के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण मैं षष्ठी कहलाती हूं। देवी ने प्रियव्रत के मृत बालक को पुनर्जीवित कर दिया। जिस दिन प्रियव्रत के मृत बालक को षष्ठी देवी ने जीवित किया वह कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि थी। इसके बाद राजा प्रियव्रत ने छठ पर्व किया। सूर्य की कृपा से प्राप्त बालक को षष्ठी देवी ने पुनर्जीवन दिया, जिससे कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को सूर्य को अर्घ्य देकर छठ मैय्या की पूजा की जाती है।

कौन हैं छठ मैया
छठ महापर्व ऐसा महापर्व है जिसमें उगते हुए और अस्त होते सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है। छठ पूजा में देवी छठी की पूजा की जाती है। छठ देवी सूर्य की बहन हैं। लेकिन अन्य मान्यता के अनुसार छठ देवी ब्रह्माजी की मानस पुत्री देवसेना मानी गई हैं। छठ मैया नि:संतानों को संतान का सुख और दीर्घायु प्रदान करती हैं। इन्हें विष्णुमाया और बालदा अर्थात पुत्र देने वाली भी कहा गया है। कहा जाता है कि संतान के जन्म के छठे दिन जो छठी मनाई जाती हैं उसमें इन्हीं षष्ठी देवी की पूजा की जाती है

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